पाठ्यक्रम: जीएस-3/रक्षा एवं सुरक्षा
चर्चा में क्यों?
- रक्षा मंत्री ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) को भारतीय रक्षा निर्माताओं को देने की मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की पहल को आगे बढ़ाना है।
मिसाइल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
- यह देशों के बीच या अनुसंधान संगठनों से औद्योगिक साझेदारों तक डिजाइन, उत्पादन, संचालन और एकीकरण संबंधी जानकारी एवं विशेषज्ञता के हस्तांतरण को कहा जाता है।
- वर्तमान समय में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव तथा आधुनिक युद्ध में सटीक हमलों और स्टैंड-ऑफ हथियारों पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए यह रक्षा आधुनिकीकरण के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक बन गया है।
मिसाइल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के प्रकार
- ऊर्ध्वाधर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: अनुसंधान, विकास और उत्पादन के विभिन्न स्तरों के बीच प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण।
- उदाहरण: DRDO द्वारा मिसाइल की अवधारणाओं को बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए भारतीय रक्षा कंपनियों को हस्तांतरित करना।
- क्षैतिज प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: विदेशी और घरेलू निर्माताओं के बीच संयुक्त उपक्रम, लाइसेंसिंग या सरकारी समझौतों के माध्यम से प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण।
- यह समान प्रकार के संगठनों या देशों के बीच हो सकता है।
विशेषज्ञता और ज्ञान:
- कैसे करें (Know-How): उत्पादन संबंधी जानकारी, जैसे तकनीकी नक्शे, संयोजन के निर्देश और मशीनरी से संबंधित जानकारी।
- क्यों करें (Know-Why): डिजाइन की अवधारणाओं, भौतिकी और स्रोत कोड का ज्ञान, जिससे स्वायत्त रूप से संशोधन, उन्नयन और नए आविष्कार किए जा सकें।
- दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी का स्पिन-ऑफ और स्पिन-इन: नागरिक और सैन्य उपयोगों के बीच दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण।
- उदाहरण के लिए, निर्देशित हथियारों में व्यावसायिक नौवहन सेंसरों का उपयोग (स्पिन-इन) या सैन्य प्रणोदन सामग्रियों को नागरिक उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों के लिए अनुकूलित करना (स्पिन-ऑफ)।
महत्व और आवश्यकता
- विस्तार और बड़े पैमाने पर उत्पादन: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) जैसे अनुसंधान संस्थान मुख्य रूप से अनुसंधान एवं विकास पर केंद्रित होते हैं।
- घरेलू निजी कंपनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने से कम मात्रा वाले प्रोटोटाइप से लेकर औद्योगिक स्तर तक उत्पादन में तेजी आती है।
- आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का प्रबंधन: विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर अत्यधिक निर्भरता भू-राजनीतिक संकट या प्रतिबंधों की स्थिति में जोखिम पैदा करती है।
- स्थानीय स्तर पर प्रौद्योगिकी को आत्मसात करने से संचालनात्मक तैयारियाँ बनाए रखने में मदद मिलती है।
- रक्षा निर्यात: भारत अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं, जैसे मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) के अनुरूप स्वदेशी रूप से विकसित और हस्तांतरित प्रौद्योगिकियों का निर्यात कर सकता है, जैसे ब्रह्मोस को विदेशी साझेदारों को निर्यात करना।
- पारिस्थितिकी तंत्र का विकास: प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण श्रृंखलाओं में शामिल करता है। इससे स्थानीय मूल्यवर्धन होता है और रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होता है।
- स्थानीय उद्यमों को तकनीकी जानकारी का हस्तांतरण एक आत्मनिर्भर औद्योगिक आधार विकसित करने में सहायता करता है।
चुनौतियाँ और मुद्दे
- निर्यात नियंत्रण: MTCR और अन्य व्यवस्थाओं में सदस्यता महत्वपूर्ण मिसाइल प्रौद्योगिकियों तथा विदेशी बौद्धिक संपदा तक पहुँच को सीमित करती है।
- विनिर्माण संबंधी कमियाँ: निजी उद्यमों के पास उच्च-स्तरीय रक्षा प्रौद्योगिकी को आत्मसात करने के लिए आवश्यक नई मशीनरी, धातुकर्म, परीक्षण बुनियादी ढाँचे और वित्तीय संसाधन नहीं हो सकते हैं।
- बौद्धिक संपदा और सुरक्षा संबंधी खतरे: आपूर्ति श्रृंखलाओं की जटिलता और व्यापकता से बौद्धिक संपदा की चोरी, रिवर्स इंजीनियरिंग, व्यापारिक गोपनीय जानकारी के लीक होने और साइबर-जासूसी के अवसर भी बढ़ते हैं।
- उच्च लागत और लंबी अवधि: मिसाइल निर्माण में परीक्षण, स्वच्छ कक्षों और गुणवत्ता प्रणालियों में बड़ी प्रारंभिक पूँजी लगती है तथा इसका प्रतिफल दीर्घकालिक खरीद अनुबंधों से जुड़ा होता है।
निष्कर्ष
- मिसाइल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भारत के लिए रक्षा का एक बड़ा आयातक देश होने से आगे बढ़कर एक स्वतंत्र उत्पादन केंद्र और दीर्घकालिक सुरक्षा निवारक शक्ति बनने के लिए महत्वपूर्ण है।
- वास्तविक रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने का अर्थ केवल लाइसेंस के तहत असेंबली करने से आगे बढ़कर ब्रह्मोस जैसे उच्च-मूल्य वाले संयुक्त उपक्रमों तक पहुँचना है, जिसमें बौद्धिक संपदा पर समान अधिकार और वैश्विक स्तर पर निर्यात करने की क्षमता हो।
- इन उन्नत प्रौद्योगिकियों को आत्मसात करने के लिए वाणिज्यिक रक्षा उद्यमों को मजबूत आंतरिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) बुनियादी ढाँचा विकसित करना होगा तथा ठोस प्रणोदक रसायन, सक्रिय रडार साधक और तापीय परिरक्षण जैसी मूलभूत क्षमताओं में दक्षता हासिल करनी होगी।
स्रोत:TH
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